Monday

जन की बात

जय भारत जय विश्व 

नर सेवा नारायण सेवा 

मैं ,उस प्रभु की सेवा करता हूँ ,जिसे अज्ञानी लोग, मनुष्य कहते है।-  स्वामी विवेकानंद 

सत्य सरल है।

प्रत्येक विचारवान है,और समाज के हित के लिए सजग बने रहने का प्रयासी भी है। और प्रत्यन भी करता है। प्रत्येक की यह चाहत है कि कैसे समाज को सुव्यवस्थित करें। जिससे सभी के लिए स्वच्छ ,शालीन और उन्नत सामाजिक वातावरण का निर्माण हो सकें। कारण भी है ऐसा सोचने वाला भी इसी समाज में एक समाज होता है। यह बात भी सभी समझते है कि सब का कल्याण से स्वयं का कल्याण भी होना है,प्रत्येक जन यह बात समझ सकता है। सभी ज्ञानी और विचारशील है। 

विकास की प्रक्रिया स्वचालित है और दिशा का भान,जन -जन का वह विचार श्रृंखला है जिसे वृत्ति  और पुनरावृत्ति (स्मरण ) करता है स्वतः। 

भारत का योग विज्ञान ( क्रियायोग विज्ञान )मानव को वही अनुभव कराता है जो वह है।  जो शब्दों से अव्यक्त है।

 
आज जिस प्रकार विकास के नाम पर राजनीतिज्ञ जिस सत्त्ता  सुख का रसास्वादन कर रहे है और विकास को गा रहे है। इस गान में भी यह समझ को समझ ही रहे होंगे कि जनता का कितना पैसा उन जनों के लिए खर्च हो रहा है जो नेतागिरी कर रहे है। सत्त्ता, देश की  सत्त्ता के लिए दल और दलों का समूह जिस एकता को बनाये रखने के लिए सजग रहते है की सत्त्ता बल को पाना निश्चय ही लाभदायी होना है। 

जनता जो एक है फिर भी कतिपय स्व कारणों से विभक्त दिखती है लेकिन जन -जन को यह बात मालूम है कि एकता से ही सब संभव है। 

जन -जन का विकास ही जन -जन का प्रयास है। 


 


Saturday

बाबासाहेब

जय भारत जय विश्व 

 डा. भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। डा. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था। अपने एक देशस्त ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे के कहने पर अंबेडकर ने अपने नाम से सकपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ लिया जो उनके गांव के नाम "अंबावडे" पर आधारित था।

कानून और न्याय मंत्री कानून और न्याय मंत्रालय और भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों में से एक है। स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री बाबासाहेब अंबेडकर थे। 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न को अम्बेडकर को मरणोपरांत प्रदान किया गया था। 


भारत का संविधान 

 भारत के रूप में भी जाना जाता है,भारत अनेक  राज्यों का संघ है। सरकार की संसदीय प्रणाली के साथ एक सार्वभौम समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है। गणराज्य भारत के संविधान के अनुसार शासित है, जिसे 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। संविधान सरकार की संसदीय रूप प्रदान करता है जो संघीय संरचना में विशिष्ट एकात्मक विशेषताएं। संघ के कार्यकारी के संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति हैं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, संघ की संसद की परिषद में राष्ट्रपति और दो सदन शामिल हैं।  जिन्हें राज्य परिषद (राज्य सभा) और लोक सभा (लोकसभा) के रूप में जाना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 74 (1) में यह प्रावधान है कि प्रधान मंत्री के साथ मंत्रियों की एक परिषद होगी जिसका अध्यक्ष राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देगा, जो सलाह के मुताबिक अपने कार्यों का प्रयोग करेंगे। इस प्रकार असली कार्यकारी शक्ति  प्रधान मंत्री के साथ मंत्रियों की परिषद  में निहित है।

Loktantr

जय भारत जय विश्व

वर्तमान में देश के जन - जन (जनता) को इस समझ को समझना ही पड़ेगा कि अब देश में नेता की नहीं जन सेवक की जरुरत है। फायदा बेहिसाब है. देश का ही नहीं देश के जन - जन को।  देश भक्त समझ जायेंगे। और जो नहीं समझ पा रहे है वो जान जायेंगे। क्योंकि यह बात जन - जन समझता ही है की कैसे नेता, सत्ता सुख और स्वयं के मान के लिए समाज को तोड़ रहे है, अपितु यह समझ हर कोई रखता है। 

जन नेता, जन - जन नेता

जन नेता, जन - जन नेता. विचार करे की देश के धन का कितना % देश के नेताओं को मिलता है सुविधाओं और अन्य रूप में . फिर भी घोटाला होता हैIऔर देश के धन को अपना बना कर नेता, राजनीति मे अपने वर्तमान को और भविष्य को सवारने के लिए लगे रहते हैI
परिवर्तन होना अनिवार्य है भारत के लोकतान्त्रिक प्रणाली में। 

जागो जन-जन जागो भारत

 विश्व में सभी धार्मिक विचारधाराओं और पवित्र धार्मिक ग्रंथो में और श्रद्धेय  कहते है, ईश्वर एक है और धर्म जोड़ता है. फिर कौन एक मानव समाज को तोड़ रहा है ? विचार करना और एक होना पड़ेगा. ॐ Prakash



Republic day


जय भारत जय विश्व

26 जनवरी 1950 को भारत देश का अपना संविधान लागू हुआ. संविधान की रूप रेखा आदरणीय डॉ. भीम राव आंबेडकर के द्वारा सृजित की गई I संविधान के लागू होने पर भारत गणराज्य बन गया I
भारत के संविधान के सृजन का मूल लक्ष्य है की भारत के जन - जन को जो विश्व के बृहद लोकतान्त्रिक भारत देश का नागरिक हो, और किसी भी धार्मिक विचारधारा का अनुयायी हो तथा समाज के किसी भी वर्ग का हो, को समानता का आधार मिलेI
भारतीय संविधान के निर्माता जो भारतीय समाज के उस वर्ग के थे , जिन्हे अविकसित सामाजिक जन अछूत मानता हैI संविधान, भारत के प्रत्येक नागरिकों को समानता से जीने का सहारा प्रदान करता हैI
यद्यपि वर्तमान में देश संकुचित, सीमित धार्मिक विचारधारा से ग्रसित गणमान्यों, नेताओ के नैतिक-अनैतिक भाषणों और स्वार्थी कृत्यों द्वारा भारत की राजनीति धूमिल हो रही हैI
फिर भी हम सभी भारतीय जन, भारत देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस को मिलकर उत्साह से मनाते हैI
भारत के 69 वे गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें I
भारत स्वतंत्र, भारत का जन - जन स्वतंत्र 

जय भारत


जय भारत जय विश्व 

अति गहन बात यह है कि कब तक अनीति को राजनीति कहेगें। राजनीति तो ऐसी व्यवस्था का सृजन करता है की कुछ जनो का ही विकास नहीं अपितु जन -जन को सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय का अनुभव करा सकती है। 
स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है की कैसे नेता गण अपने राजनैतिक दुकानों (पार्टी /दलों ) के द्वारा अल्प समय में अति धनवान बन जाते है। इन दुर्बलों की समझ इतनी निर्बल हो जाती है की ये दलों के दल -दल में अपने को फांसकर दल - बदलू बन सत्ता - सुख को प्राप्त कर लेते है और अपना सुनिश्चित विकास करते है और सामान्य जनो के लिए अनिश्चित विकास भाषणों द्वारा करने के लिए तत्पर रहते है। 

परिवर्तन, ही समाज को परिमार्जित कर उत्कृष्ट बनाता है।

सत्य सरल है। 

क्षेत्र की समस्या का निराकरण तभी संभव है जब जन - जन चाहेगा। 
वर्तमान ही है जो भावी को स्वच्छ ,सुन्दर और सम्पन बनाता है, तब जब हम(आप + मैं ) प्रयास करे। 
ये सोचना की मतदान कर मुक्त हो गए, तो कभी भी विश्व , देश ,प्रदेश ,जिला , वार्ड , मोहल्ला स्वच्छ ,सुन्दर हो नहीं हो पायेगा, तो इस बात को समझ लेना ही कि 

विकास सपना है। जो नेताओ द्वारा दिखाया जा रहा है। 
भारत की राजनीति को स्वच्छ करना ही होगा और होना ही है। 
जन - जन का विकास ही देश का विकास कर सकता है। नहीं तो अच्छे दिन तो उन्ही गणमान्यों का विकास करता रहेगा जो नैतिक - अनैतिक भाषणों से यह जताने में लगे रहते है की विकास हो रहा है। 
विकास तो होगा ही यही तो क्रम है संसार का , विचार कर देखे तो पाएंगे की जैसे शरीर बढ़ता है वैसे ही समझ भी बढ़ती है। तो क्या देश विकास नहीं कर रहा है। 
विकास एक स्वप्रक्रिया है, हाँ, तीर्व करना ही नीति है और देश के विकास को तीर्व करना राजनीति के द्वारा ही संभव है। 

जागो जन - जन।

Sunday

Freedom from unemployment

बेरोजगारी से स्वतंत्रता

 कैसे भारत ही नही विश्व समाज को बेरोजगारी से मुक्त बनाना है। प्रयास करना मानव के लिए हितकर है और जब लाभ को होना सुनिश्चित है तो साथ सबका  हो।  

15 लाख प्रति परिवार की बड़ी योजना का प्रारम्भ करना क्यों जरुरी है और जन - जन के हित में है।  
विचार करें - 
क्या लोकतंत्र कुछ लोगों को ही आराम(सत्ता - सुख ) देता रहेगा और ये कुछ लोग जनमत को अपने हित, और मन माफिक बात को भाषणों , ढेरो नैतिक /अनैतिक  विचारो से विकास का  करते रहते है।  लेकिन  ऐसे  किसी भी विचार ( योजना ) का गठन नही  करते है।  जिसके द्वारा जन -जन का विकास सुनिश्चित हो।  
क्यों ? 
 जन इस बात को को नही समझ पा रहे है कि राजनीति का मूल भाव क्या " सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय " के अतिरिक्त और भी कुछ है।  

जागो जन - जन जगाओ भारत 

15 लाख प्रति परिवार बड़ी योजना को शुरू होना  है। 
क्या देश के शीर्षतम स्थान पर बैठे आदरणीय जन विचार करें। 


 प्रणाम जन -जन को 
विकास क्या है ? 
विश्व के सभी देश और जन - जन विकास कर रहे है।  भारत देश सदैव से ही मानव विकास की दिशा का मार्गदर्शन करता रहा है।  भारत के सभी दिव्य परमात्मा / आत्मा योगियों ने सच्चे विकास पथ पर चलने का निर्देश अपने विचारों द्वारा प्रकट कर  मानव जाति का विकास करते जा रहे है।  यह बात हर भक्त जानता है, ईश्वर ही सब है।
वर्तमान समाज में विकास की गति को तीर्व करना आसान है जब जन -जन इस बात को विचारों में और अपने विचार से  इस विचार पर विचार करे की विकास कौन कर रहा है।  क्या लोकतंत्र में वह ही विकास कर पाते है जो सत्ता प्राप्ति के लिए अपने अनैतिक / नैतिक भाषणों से जनता को भर्मित कर रहे है।  और पहले से ही विघटित  समाज को तितर -बितर कर रहे है कि जनता का मत (वोट ) बहुमत के रूप में पा कर सत्ता -सुख प्राप्त कर विकास की बाते कर सकें। 
विकास वह शब्द है जो नवीनता की झलक दिखता है।  
वर्तमान भारत में युवा वर्ग उत्साहित है और सजग है विकास करने के लिए और प्रयासरत है। निश्चय ही धन सब नही है लेकिन माध्यम है विकास गति को तीर्व करने का जन -  जन के लिए। 
विचार करें - क्या खोट है इस योजना में 

15 लाख प्रति परिवार 

है तो चाहता हूँ।  कृपा कर बताएं जन -जन 


जन - जन का साथ ही जन - जन विकास है। आप मित्रों से मांग करता हूँ कि इस बड़ी योजना के सृजन हेतु एकजुट हो और भारत देश के एक -  जन को सम्बृद्ध कर, भारत देश को विकसित राष्ट्र बनाना है। 

   





                              -AIM-

 ALLAHABAD INTERNET MARKETING

Unlimited Opportunities for all. 

World know, better Internet & Electronic Communication devices are involving in daily life moments. Best way to get freedom from unemployment problem solved with the help of Internet marketing perfect way to generate the Work/Business/Job very easily. 


            भारत निर्माण में रोजगार का भन्डार 
सुधार और सुधार  - 

21 जून  हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र जी के विचार प्रयास से  भारत देश के आध्यत्मिक ज्ञान योग विज्ञान  का योगा दिवस के रूप में मनाया जाना, हम सब  को सदैव गर्वान्वित करता है।  

Truth is always simple for all. 

सभी जानते है कि मानव की शाक्ति आपार है. यदि वह स्वयं को जानने का प्रयास करे तो निष्चय ही पुनः विचार करेगा कि जीवन का क्या उद्देश्य है। प्रयास ही सफलता का धोतक है। 


आश्चर्य होगा जब आप विचार करेंगे कि प्रत्येक आदमी का चेहरा अलग-अलग  होता है लेकिन साँस एक है। जिसे हम मनुष्य पकड़ सकते है वैज्ञानिक विधि से और जान सकते है वास्तविक जीवन को जो अमर है और अनन्त ऊर्जा है। जो सब रूपों में दृश्य और अदृश्य है।  निश्चय यह विषय वाणी या किसी भी बाहरी साधन से नहीं प्राप्त किया जा सकता है।  इसके लिए हम मनुष्यो को वैज्ञानिक दृष्टिकोण  और इच्छा को सही दिशा में और निश्चय साधन जो क्रियायोग विज्ञान के द्वारा उपलब्ध है , का  अनुसरण करना ही पड़ेगा आज नहीं तो कल या अगली बार या जब पुनः दृश्य होगे मानव रूप में इस स्वपन संसार में।  

हम से प्रत्येक कोई चाहत रखता है की उसे भगवान कृष्ण /गॉड /अल्लाह /नानक/बुद्ध /महावीर / और सब नाम या स्थान  या जहां से आतंरिक शान्ति का आभास होता है। मिल जाये।जिससे जीवन सफल हो जाये। 

                                      क्रियायोग विज्ञान 


वर्तमान समय द्वापर युग का आरोही काल है वर्ष 317  वां   


जैसा हम सभी देख और समझ सकते है कि मानव बुद्धि अनोखे और विषमय करी तथ्यों को उजागर कर रही है। 

Monday

Social party

जय भारत जय विश्व

जन -जन की बात ,जनता  के साथ 
महात्मा ( महान आत्मा ) शब्द द्वारा ऐसे व्यक्तित्व के प्रति सम्बोधन है , जिसने धर्म की आधारशिला जो मात्र अहिंसा है , का अनुसरणकर्ता बनकर भारतीय समाज को एकता के सूत्र में बांध /संगठित कर भारत देश को स्वतन्त्रता से शुशोभित करते हुए , विश्व जन मानस को भी 'अहिंसा परम धर्म ' का पाठ पढ़ाने वाले महापुरुष को सम्पूर्ण विश्व ' महात्मा गाँधी '(मोहनदास करमा चंद गाँधी) के नाम से पुकारते है।  
महात्मा गांधी जी की जीवनचर्या और विचार स्वतः राजनितिक संत के रूप में विश्व समाज को प्रेरित करते है।  गांधी जी द्वारा अहिंसा की व्याख्या " विचार या कृति से किसी जीव  को किसी प्रकार की हानि न पहुँचाना। ऐसे सुन्दर आदर्श धारण एवं कृत्यों द्वारा प्रकट करने वाला जीवन सदैव ही जन -जन की लिए प्रेरणादायी ही है।  महात्मा गांधी की अहिंसा की पुकार मनुष्य की अंतरात्मा को छूती है।  गांधी जी कहते है ' रक्तपात के द्वारा अपने देश को स्वंतंत्र कराने का प्रयास करने की अपेक्षा आवश्यक हुआ तो मै सदियों तक स्वंतंत्रता की प्रतिक्षा करुँगा।  
  ऐसे दृढ़ी अहिंसावादी द्वारा ही भारत की प्रखरता को और प्रकाशित कर विश्व को प्रेरित कर रहा है।  महात्मा गांधी  जी के उच्च सेवाभाव उनके द्वारा लिखे गए " यदि मुझे फिर से जन्म लेना पड़े तो मैं अछूतो के बीच अछूत बन कर ही जन्म लेना चाहुँगा , क्योंकि उसके द्वारा मै और अधिक प्रभावशाली ढंग से उनकी सेवा कर सकूंगा।
यदपि मानव में सदैव 2 प्रकार की प्रवृत्ति रहती है।  1 अहिंसात्मक 2 हिंसात्मक
भारत आदिकाल से ही आध्यत्मिक देश है और आध्यत्म  पथ का पथिक इस बात को अनुभव और सूक्षम विचारों द्वारा यह भान पाता ही है कि अहिंसा के तपते पथ पर चलकर ही वह आध्यत्मिक उन्नति को आतंरिक शान्ति के रूप में पा सकता है।  
महात्मा गांधी जी का  जीवन चरित्र भी अहिंसा को स्पष्ट रूप से विश्व के समक्ष उपलब्ध है।  इस बात को भी  दृष्टिगत करता है।  संसार ने सर्वप्रथम यह भी देखा की किस प्रकार किसी भी देश की सामाजिक कुरीतियों एवं विषमताओं को अहिंसा के बल से सुव्यवस्थित , भेदभाव मुक्त स्वच्छ और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारा , एकता से सामान्य जनों को संगठित कर देश/जन -जन के हित के वास्ते संगठात्मक बल का निर्माण कर , महात्मा गांधी जी ने भारतीय जनों   
एवं विश्व के सभी राष्ट्रों को प्रत्यक्ष यह सिद्ध कर दिया की अहिंसा ही वह  मार्ग है जो एक के लिए ही नही अपितु प्रत्येक जन और राष्ट्र के लिए सर्वोन्नति के मार्ग को बनाता है।  महात्मा गांधी जी का जीवन उन्ही जनों को प्रेरित करता है , जिनकी आतंरिक प्रवित्ति अहिंसात्मक है।  यह भी कटु सत्य है कि हिंसात्मक प्रवित्ति का पोषण करने वाले दुर्बल जनों के लिए गांधी जी के विचार एवं कार्य सदैव फास (शूल )की भांति ही प्राप्त करते रहेंगे।  

भारत के राजनितिक संत गांधी अपने सिद्धांत को इन शब्दों में प्रकट करते है " मैंने देखा कि विध्वंस और विनाश के बीच जीवन चलता रहता है।  इसलिए विनाश से बड़ा कोई नियम अवश्य  है।  केवल उसी नियम के अंतर्गत किसी सुव्यवस्थित समाज का अस्तित्व संभव हो सकता है और जीवन जीने योग्य बन सकता है।  अहिंसा की मानसिक अवस्था प्राप्त करने के लिए काफी कष्टप्रद साधना की आवश्यकता होती  है।  उसके  लिए सैनिक  के जीवन की भांति कठोर अनुशासन बद्ध जीवन की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्णावस्था तभी आती है , जब मन , शरीर एवं वाणी में पूर्ण समन्वय स्थापित हो जाये।  यदि हम सत्य और अहिंसा के नियम को अपने जीवन का नियम बनाने की ठान लें तो , प्रत्येक समस्या अपना समाधान स्वयं प्रस्तुत कर देगी " 

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जन - जन की आवाज जनता की आवाज़ 

Wednesday

Hindi

जय भारत जय विश्व 

संसार में एक ही भाषा है विद्धमान जो है " प्रेम " यही वह भाषा है जिसे समझना और समझाना सहज है।  जन -जन के लिए। 

भारत देश में 14 सितम्बर को राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस मनाया जाता है।  भारत के राष्ट्र भाषा हिंदी है।  हिंदी भाषा की सरलता एवं वृहदता असीम है।  

जिस प्रकार विश्व जन समुदाय में बोली जाने वाली भाषाएं आदरणीय एवं सम्मानिये है क्योंकि भाषा कोई भी हो, वह सदैव वक्ता के विचारों को वयक्त करती है " शब्दों " के द्वारा।  

हिंदी भाषा गहनतम विचारों और भावों को स्पष्टता के साथ व्यक्त करती है।  भारत देश के विभिन्न प्रांतो में विभिन्न भाषाएं भारतीयों जनो द्वारा बोली जाती है।  फिर भी प्रत्येक भारतीय इस बात का बोध रखता है कि हिंदी भारत देश के राष्ट्रभाषा है।  यह बोध ही भारत के जन -जन द्वारा दिया गया सम्मान " हिंदी " भाषा को स्वतः ही महान बना रहा है।  

भाषा को दो रूप में व्यक्त करते है।  1 - मौखिक   2  लिखित 

सांकेतिक भाषा भी एक प्रकार है।  ( symbolic Language )
भाषा का क्षेत्रीय रूप बोली कहलाता है।  
किसी प्रान्त अथवा उपप्रान्त की बोलचाल और साहित्य  रचना की भाषा उपभाषा कहलाती है।  एक उप भाषा में एक से अधिक बोलियाँ होती है।  
 उपभाषा  एवं बोलियाँ 
पूर्वी हिंदी - अवधी,बघेली , छत्तीसगढ़ी , भोजपुरी 
पश्चिमी हिंदी - ब्रज, खड़ी बोली, हरियाणवी, कन्नौजी, बुंदेली 
राजस्थानी - मेवाती , मारवाड़ी ,जयपुरी ,मालवी , हाड़ोती 
पहाड़ी - मंडियाली, गढ़वाली, कुमाँऊनी आदि 
मागधी - अंगिका, भोजपुरी, मैथिली,मगही  आदि 
बिहारी - भोजपुरी, मगधी,मैथिली आदि 


जागो जन - जन जगायो भारत 

क्रिययोयोग विज्ञान 


भारत विविध विविधताओं का देश है।  

22 भाषाओं को संविधान में मान्यता प्रदान की गई है।  

असमी , सिंधी , कन्नड़ , कश्मीरी , कोंकड़ी , मराठी , बंगाली , उर्दू , मणिपुरी , गुजरती , उड़िया तेलुगू , डोगरी , संस्कृत , हिंदी , मलयालम , बोडो , तमिल , नेपाली , पंजाबी , संथाली मैथिलि

प्रादेशिक भाषा 

कर्नाटक - कन्नड़                           केरल   - मलयालम              प० बंगाल  - बंगाली 

आंध्रप्रदेश  - तेलुगू  ु                   उड़ीशा  - उड़िया                   तमिलनाडु - तमिल 

हरियाणा -  हरियाणवी                  उ०प्रदेश - हिंदी                     गुजरात  - गुजराती 

मणिपुर  - मणिपुरी                       असम - असमिया                गोवा  - कोंकणी , मराठी 

कश्मीर - कश्मीरी                         पंजाब  - पंजाबी                   महाराष्ट्र  - मराठी  

मातृभाषा  का शाब्दिक अर्थ है  - माँ द्वारा या परिवार द्वारा बोली जाने वाली भाषा।  

" भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343  के  अनुसार 14  सितम्बर 1949 को हिंदी भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान के इसलिए प्रतिवर्ष १४ सितम्बर 

                               हिंदी  दिवस मनाया जाता है।     

अंतरराष्ट्रीय भाषा अभी इंग्लिश है।  

हिंदी सीखिए     क्लिक हियर  


भारत जोड़ो, संसार जुड़े 

इच्छा  को पूरा करवाना , एकता बल से होता है।  भारत एक है।  भारत के एकता , भाषा माध्यम से जुड़ना ऐसा है कि राष्ट्रभाषा का सम्मान - ज्ञान  भारतीय की शान।  


जय सरकार 

-- बांटे रेवाड़ी पुनि - पुनि आपनो ले।  

ब्लॉग सन्देश 
भारत देश,स्वतंत्र राष्ट्र का उद्घोष " जय भारत " जब जन -जन  के कंठो से स्फुटित होता है तो प्रत्येक ही भारत ( ज्ञान + रत ) हो देश को रोशन ही करता है।  
भारत देश के आध्यतमिक पथ के अभ्यास से प्राप्त विचारों को विश्व जन समूह ने स्वीकृत कर , भारत देश के प्रधान मंत्री जी के विचार सम्मान स्वरुप 

21 जून ( विश्व योग दिवस ) 

के रूप मनाया जाना।  प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है।               

                                                                             आपको सहृदय धन्यवाद