जन की बात
ॐ परब्रह्मणे नमः जय भारत जय विश्व जन जागो जन जन जागो यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिः भवति भारत, अभि-उत्थानम् अधर्मस्य तदा आत्मानं सृजामि अहम् । परित्राणाय साधूनां यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिः – जब जब धर्म (मानसिक सच्चरित्रता) की हानि होती है तब–तब धर्म (मानसिक सच्चरित्रता) का निर्माण करने के लिये धर्म (मानसिक सच्चरित्रता) का उदय करने के वास्ते अंतर्मन में आती है सब कल्याण करने के लिये मैं ,उस प्रभु की सेवा करता हूँ ,जिसे अज्ञानी लोग, मनुष्य कहते है।- स्वामी विवेकानंद https://www.facebook.com/share/1VARSP5SUa/ सत्य सरल है। हृदयस्थ मित्रों , धर्म ( मानसिक सच्चरित्रता ) एक है। जन -जन के लिए चाहे आप किसी भी धार्मिक विचारधाराओं के मानने वाले हो हिन्दू ,ईसाई ,इस्लाम ,सिख ,बौद्ध ,जैन ,यहूदी आदि -आदि। के अनुनायी हो और किसी भी जाति /वर्ग से सम्बंधित हो। राजनीति के द्वारा सत्ता पाना आसान है निकट बीते समय...