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जन की बात

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ॐ परब्रह्मणे नमः  जय भारत जय विश्व  जन जागो जन जन जागो  जन की बात  जन-जन का सहयोग है "जनता" अपितु यह एक सम्बध है ह्रदय के प्रेम का फिर भी यह इतना बृहद है जिसे कोई मानव अंतर्मन में स्थापित कर सकता है मौन होकर।  जीवन और मृत्यु मन के विचारों का खेल है जो माया की ओर संकेत करता है फिर भी मानव जीवन जिसमे सर्वस्व है और यह  भान या बोध करने का सद्गुण कि " मैं कौन हूँ ?"  वेद,पुराण,श्री मदभगवदगीता,बाइबिल,क़ुरान,गुरुग्रन्थ साहिब में और वह सारे पवित्र धार्मिक पुस्तकें इतना ही कहती है कि                           "परमात्मा एक है." भारत अर्थात भा=ज्ञान + रत =रमा हुआ  भारत के दिव्य महागुरूओं ने इतना ही कहते है की हम(आप+मै) सब एक परमात्मा की संतान है और सब अमर हैं।   निसन्देह जो सब है साकार भी और निराकार भी और दोनों के मध्य में वह ही है जो सब नामों,रूपों में है और वही सर्वस्व है।    वह कहाँ है यह खोज उनके लिये ही जो जीवन-मृत्यु का अपरभाषित वैचारिक मन के खेल(माया) से परे जा...