Monday

जन की बात

जय भारत जय विश्व 

नर सेवा नारायण सेवा 

मैं ,उस प्रभु की सेवा करता हूँ ,जिसे अज्ञानी लोग, मनुष्य कहते है।-  स्वामी विवेकानंद 

सत्य सरल है।

प्रत्येक विचारवान है,और समाज के हित के लिए सजग बने रहने का प्रयासी भी है। और प्रत्यन भी करता है। प्रत्येक की यह चाहत है कि कैसे समाज को सुव्यवस्थित करें। जिससे सभी के लिए स्वच्छ ,शालीन और उन्नत सामाजिक वातावरण का निर्माण हो सकें। कारण भी है ऐसा सोचने वाला भी इसी समाज में एक समाज होता है। यह बात भी सभी समझते है कि सब का कल्याण से स्वयं का कल्याण भी होना है,प्रत्येक जन यह बात समझ सकता है। सभी ज्ञानी और विचारशील है। 

विकास की प्रक्रिया स्वचालित है और दिशा का भान,जन -जन का वह विचार श्रृंखला है जिसे वृत्ति  और पुनरावृत्ति (स्मरण ) करता है स्वतः। 

भारत का योग विज्ञान ( क्रियायोग विज्ञान )मानव को वही अनुभव कराता है जो वह है।  जो शब्दों से अव्यक्त है।

 
आज जिस प्रकार विकास के नाम पर राजनीतिज्ञ जिस सत्त्ता  सुख का रसास्वादन कर रहे है और विकास को गा रहे है। इस गान में भी यह समझ को समझ ही रहे होंगे कि जनता का कितना पैसा उन जनों के लिए खर्च हो रहा है जो नेतागिरी कर रहे है। सत्त्ता, देश की  सत्त्ता के लिए दल और दलों का समूह जिस एकता को बनाये रखने के लिए सजग रहते है की सत्त्ता बल को पाना निश्चय ही लाभदायी होना है। 

जनता जो एक है फिर भी कतिपय स्व कारणों से विभक्त दिखती है लेकिन जन -जन को यह बात मालूम है कि एकता से ही सब संभव है। 

जन -जन का विकास ही जन -जन का प्रयास है। 


 


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