Saturday

Republic day


जय भारत जय विश्व

26 जनवरी 1950 को भारत देश का अपना संविधान लागू हुआ. संविधान की रूप रेखा आदरणीय डॉ. भीम राव आंबेडकर के द्वारा सृजित की गई I संविधान के लागू होने पर भारत गणराज्य बन गया I
भारत के संविधान के सृजन का मूल लक्ष्य है की भारत के जन - जन को जो विश्व के बृहद लोकतान्त्रिक भारत देश का नागरिक हो, और किसी भी धार्मिक विचारधारा का अनुयायी हो तथा समाज के किसी भी वर्ग का हो, को समानता का आधार मिलेI
भारतीय संविधान के निर्माता जो भारतीय समाज के उस वर्ग के थे , जिन्हे अविकसित सामाजिक जन अछूत मानता हैI संविधान, भारत के प्रत्येक नागरिकों को समानता से जीने का सहारा प्रदान करता हैI
यद्यपि वर्तमान में देश संकुचित, सीमित धार्मिक विचारधारा से ग्रसित गणमान्यों, नेताओ के नैतिक-अनैतिक भाषणों और स्वार्थी कृत्यों द्वारा भारत की राजनीति धूमिल हो रही हैI
फिर भी हम सभी भारतीय जन, भारत देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस को मिलकर उत्साह से मनाते हैI
भारत के 69 वे गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें I
भारत स्वतंत्र, भारत का जन - जन स्वतंत्र 

जय भारत


जय भारत जय विश्व 

अति गहन बात यह है कि कब तक अनीति को राजनीति कहेगें। राजनीति तो ऐसी व्यवस्था का सृजन करता है की कुछ जनो का ही विकास नहीं अपितु जन -जन को सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय का अनुभव करा सकती है। 
स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है की कैसे नेता गण अपने राजनैतिक दुकानों (पार्टी /दलों ) के द्वारा अल्प समय में अति धनवान बन जाते है। इन दुर्बलों की समझ इतनी निर्बल हो जाती है की ये दलों के दल -दल में अपने को फांसकर दल - बदलू बन सत्ता - सुख को प्राप्त कर लेते है और अपना सुनिश्चित विकास करते है और सामान्य जनो के लिए अनिश्चित विकास भाषणों द्वारा करने के लिए तत्पर रहते है। 

परिवर्तन, ही समाज को परिमार्जित कर उत्कृष्ट बनाता है।

सत्य सरल है। 

क्षेत्र की समस्या का निराकरण तभी संभव है जब जन - जन चाहेगा। 
वर्तमान ही है जो भावी को स्वच्छ ,सुन्दर और सम्पन बनाता है, तब जब हम(आप + मैं ) प्रयास करे। 
ये सोचना की मतदान कर मुक्त हो गए, तो कभी भी विश्व , देश ,प्रदेश ,जिला , वार्ड , मोहल्ला स्वच्छ ,सुन्दर हो नहीं हो पायेगा, तो इस बात को समझ लेना ही कि 

विकास सपना है। जो नेताओ द्वारा दिखाया जा रहा है। 
भारत की राजनीति को स्वच्छ करना ही होगा और होना ही है। 
जन - जन का विकास ही देश का विकास कर सकता है। नहीं तो अच्छे दिन तो उन्ही गणमान्यों का विकास करता रहेगा जो नैतिक - अनैतिक भाषणों से यह जताने में लगे रहते है की विकास हो रहा है। 
विकास तो होगा ही यही तो क्रम है संसार का , विचार कर देखे तो पाएंगे की जैसे शरीर बढ़ता है वैसे ही समझ भी बढ़ती है। तो क्या देश विकास नहीं कर रहा है। 
विकास एक स्वप्रक्रिया है, हाँ, तीर्व करना ही नीति है और देश के विकास को तीर्व करना राजनीति के द्वारा ही संभव है। 

जागो जन - जन।

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