Wednesday

BHARAT JODO SANSAAR JUDE

भारत जोड़ो संसार जुड़े 



समाज तो एक है और समाजों की समयस्या अनेक,जिनमे से एक है बेरोजगारी जो सभी समाजों का अधिकाधिक विघटन को पनपाने में विशेष कारण रखा है. 

सर्वतोन्नति तो तभी है जब एक ही जुट हो।  और सभी जन एक ही है। 


समयस्या का निदान है हुनर 

वर्तमान समय सदैव शान्त ही है।  हलचल है तो समाज के वातावरण में जहां चाहिए विकास जन का, जन -जन का और जन और जन-जन  द्वारा   संभव है।   

                                                        

भारत जोड़ो संसार जुड़े






Goal of Life miracle .




मैं भी खेती से अपना पेट भरता हूं।

तथागत भिक्षाटन के दौरान एक बार काशी में किसी किसान के घर चले गए और भिक्षा पात्र आगे बढ़ाया। 

किसान ने एक बार उन्हें ऊपर से नीचे तक देखा।  बुद्ध का शरीर पूर्णांग था।  वह किसान भिक्षा या दान - पुण्य को फालतू मानता था।  बुद्ध को गहरी निगाह से देखते हुआ वह बोला, मैं तो किसान हूं। परिश्रम करके अपना पेट भरता हूं। साथ में और भी कई वयक्तियों  का। तुम क्यों बिना परिश्रम किए भोजन प्राप्त करना चाहते हो? बुद्ध ने अत्यंत ही शांत स्वर में उत्तर दिया, मैं भी किसान हूं। मैं भी खेती करता हूं।  किसान को यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने पूछा, फिर आप भिक्षा क्यों मांग रहे है? 

भगवन बुद्ध ने किसान की शंका का समाधान करते हुए कहा, हाँ वत्स ! मैं भी खेती करता हूं। पर वह खेती आत्मा की है।  मैं ज्ञान के हल से श्रद्धा के बीज बोता हूं। उसे तपस्या के जल से सींचता हूं।  विचारशीलता इस हल की फाल है।  सतत अभ्यास का यान मुझे उस गंतव्य की ओर  रहा है, जहां न दुःख है , न संताप।  मेरी इस खेती से अमरता की फसल लहलहाती है।  तुम मुझे अपनी फसल का कुछ भाग दो और मैं भी तुम्हें अपना अर्जित बांटू, तो सौदा कैसा रहेगा।  

फिर भी किसान को संतोष न हुआ।  कुछ पल ही बीते थे कि बुद्ध के पीछे आ रहे भिक्षुकों के एक दल वहाँ आ गया।  उस दल में शामिल काशी के शेट्टी गोशाल को किसान ने पहचान लिया।  गोशाल के पिता से वह अक्सर उधार लिया करता था।  किसान ने गोशाल को उसके पिता के परिचय से ही पुकारा।  गोशाल ने उसके सामने ही बुद्ध को प्रणाम किया।  यह देखकर किसान के सारे तर्क गिर गए।  उसका मुँह आश्चर्य से खुला ही रह गया।  वह तथागत के चरणों में अवनत हो गया। 

                                                                                                           आचार्य चतुरसेन       


                                   WAY IS UNIQUE 


भारत जोड़ो और संसार जुड़े 

बेरोजगारी मिटाना समाज से क्यों जरुरी है क्योंकि जब तक आर्थिक (सम्बृद्धि ) स्वतंत्र का अनुभव पाने के बाद
स्वतः ही  जन - जन की विचार दिशा परिवर्तन होना है। धन  के आने का स्रोत का निर्माण करना अनिवार्य है।  
यही प्रयास है।  
जन -जन का साथ, जन -जन का विकास 
सबका साथ ही सबका विकास कर सकता है।  

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