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Life

जीवन 

मानव जीवन की महत्ता महान है।  अधिकांश जन सीमितता  के विचारों से इस प्रकार ओत -प्रोत  है कि वास्तविक जीवन का भान तक नहीं कर पाते और यही स्वीकार कर पाते है की मृत्यु (परिवर्तन ) ही को अंत के रूप में देख पाते है। ऐसा मानव जीवन चाहे जितना भी भौतिक सम्पनता से भरा हो और कितने ऊँचे सांसारिक कार्य -व्यपार  में पदस्थ हो सब व्यर्थ ही है।  कोयंकि मानव जीवन के लक्ष्य का भान भी न होना ऐसा है जैसे जानवर का जीवन -चक्र। 

वास्तव मे यह बात तब तक असमझ है जब तक मानव जिज्ञासा किसी ऐसे मार्ग का पथिक  नहीं हो जाता है ,जिसका आधार विज्ञान हो। 

क्रियायोग -विज्ञान 

मानव जीवन यथार्थ में भौतिकता और अध्यत्मिकता का समिश्रण है।  कष्ट  युक्त तब ही तक है जब तक मात्र भौतिकता पूर्ण विचारों को सृजित करते रहेंगे।  खेदजनक बात यह भी है की लोग वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त निष्कर्षो का सार जो भौतिक अस्तित्व के भाग को स्पष्ट करता है।  ऐसी शिक्षा पद्धाति का क्या लाभ जो मानव को जीवन का भान भी न करा सके। 

वर्तमान विश्व के प्रत्येक देश गति के साथ विकास और विनाश की पथ पर क्रियाशील है।  और प्रत्येक धार्मिक विचारधारा  हिन्दू ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख , बौद्ध ,जैन ,यहूदी आदि अपने प्रारूप से इस हद तक ज्ञानियों  द्वारा ही धूमिल हो गया है  कि सामान्य जन  को भ्रमित कर रहा है।  यह धार्मिका न्धता के कारण सामाजिक वातावरण का दोहन कर आतंकवाद ,साम्राज्य वाद  और अनगिनत विचारों और भावों द्वारा मन -मस्तिक को पोषित कर  रहा है।  यद्पि सत्य सरल है और यही प्रत्येक सैद्धान्तिक धार्मिक विचारधारा में उपलब्ध है और सभी का मत एक है है।                                       ईश्वर एक है।    

यही सार भी है वेद , बाइबिल ,कुरान ,गुरु ग्रन्थ साहिब और सब ज्ञान यही तो है जो मानव का चरम है।   

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