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Caste

जाति 

समाज में मनुष्यो को वर्गीकृत किया गया है।  और इसे जाति शब्द से  नामांकित है। 

जातीय वर्गीकरण का आधार मनुष्य की आतंरिक अवस्था के अनुसार निरूपित किया जाता है।  ( श्री मद भगवत गीता )

यद्यपि दीर्घ अतीत से अज्ञनता एवं स्वार्थ के वशीभूत  हो जातीय वर्गीकरण का आधार सांसारिक कार्यो के नुसार स्थापित कर , एक मानव समाज को खंडित कर दिया।  जिसके परिणाम स्वरुप समाज में भेद -भाव , ऊंच-नीच और निंदनीय विचारों से समाज में विघटन प्रकट रूप में प्रदर्शित होने लगा।  

मूलतः समाज चार भागो में विभक्त है 1 शूद्र 2 वैश्य 3 क्षत्रिय 4 ब्राह्मण। 

अपितु लोगो ने इस चार स्तरीय वर्गीकरण को संख्या ,हित और सीमित एकता को व्यक्त करने हेतु असंख्य उपजातियो का गठन कर , समाज को अधिकतम स्तर तक छिन्न -भिन्न कर दिया।  इस व्यर्थ के विघटन का अधिकतम लाभ ( राजनीतिज्ञ , राजनीतिज्ञ पार्टी (समूह ) और वह विशेष जन जो वर्ग का प्रतिनिधित्व करते है) प्राप्त करने के लिए स्वयं को श्रेष्ठ बनाने / बताने  के लिए , वर्ग विशेष का गुणगान करते रहते है और स्वार्थ साधते है।  वर्ग विभिन्ता भी एक महत्वपूर्ण अवरोध है जिस कारण  समाज का चतुर्मुखी विकास गाति सामान रूप से जन -जन  को विकसित नहीं कर पाती है।  जिसका परिणाम समाज आर्थिक असमानता के विचारो से ग्रसित होता है।  समाज को आर्थिक विषमता को पोषित करने वाला अति महत्वपूर्ण कारण /कारक जातीय वर्गीकरण है।  

सत्य सरलतम है और स्वीकार्य होता है प्रत्येक नागरिकों को चाहे वह विश्व के किसी भी देश का हो।  प्रत्येक जन यह अभिलाषा रखता है कि उसकी जातीय स्थिति  या जाति नाम से जाने न भी लेकिन उसके देश का सम्मान करे जैसा वह सभी नागिरकों का करता है।  सामान्यता  सभी चाहते है कि नागरिकता (देश ) का सम्मान करे चाहे जातिसूचक शब्दो को जाने या न जाने। 


जाति बंधन से बंधे रहना / मुक्त रखना प्रत्येक की स्वइच्छा  है। 

समाज में सभी जातियाँ और उपजातियाँ में सम्पनता और निर्धनता व्यप्त है। 

आरक्षण वह सुविधा है जिसे समाज में सभी चाहते है लेकिन खेदजनक यह है कि जाति /उपजाति आधारित होना।  अपितु इस व्यवस्था का लाभ का आधार मात्र जातीयता तक होना नीतिगत नहीं प्रतीत होता है।  आरक्षण का हकदार वह प्रत्येक जन है चाहे वह सामाजिक जातीय वर्गीकरण के किसी भी वर्ग का हो।  


संसार बुद्धिजीवियों से भरा है और प्रत्येक तत्पर है ,कार्यरत है  और आशावान है देश के विकास के लिए।  देश का विकास होना सुनिश्चित है बस हम सभी को अपने दिल में भारत / विश्व को सम्पनता प्राप्त करने वाला महान एकता का बल का स्मरण रखना है की समाज / विश्व अनंत भागो में बांटा हो तब भी प्रत्येक यह समझ रखता है कि मानव एक जाति है भले ही वर्गीकृत है वैसे ही विश्व एक देश है मानव के लिए भले ही वह किसी भी देश का नागरिक हो।  

आरक्षण लाभप्रद है लेकिन आरक्षण व्यवस्था तभी समाज के लिए हितकारी है जब स्थिति /परिस्थिति  के अनुसार /अनुरूप  लाभार्थी चयनित हो सके , अन्यथा आरक्षण एक धोखा है , जिसे प्रत्येक वर्ग अपने लिए चाहते है। 

एक जुट समाज स्वतः ही प्रत्येक जीवन / क्षेत्र को आरक्षित करता है। 


















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