Thursday





जातियता से जुड़े रहना या भूल जाना प्रत्येक इंसान की अपनी इच्छा है। 
विचार तो करना ही पड़ेगा की यह समाज के लिए हितकारी है या नहीं। 
 मनुष्य बुद्धिमान है।   
इच्छा काया,इच्छा  माया ,इच्छा जग(दोस्त ) उपजाया। 
कह कबीर ये चित विवर्चित ताका पार न पाया। 


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