Tuesday

बिना मांगे न दो 

भगवान  बुद्ध से एक जिज्ञासु ने पूछा, मानव जीवन का लक्ष्य क्या है? उन्होंने बताया, निर्वाण अर्थात सभी बंधनो से मुक्ति। जिज्ञासु ने कहा, भगवान, आप लोगों को तरह -तरह के साधन बताते है। क्यों नहीं उन्हें सीधे-सीधे निर्वाण प्राप्त करा देते है। 
बुद्ध ने उससे कहा बिना मांगे किसी को कुछ देना ठीक नहीं।  तू ऐसा कर, गॉव जाकर लोगो से उनकी महत्वाकांक्षा  के बारे में पूछ कि वे क्या चाहते है ? 
उसने गांव के लोगो उनकी महत्वाकांक्षा के बारे में पूछी और उसे लिखकर बुद्ध के पास लौट आया। बुद्ध के कहने पर उसने पढ़कर सुनाने लगा किसी को धन चाहिए ,तो किसी को  स्वास्थ।  किसी को पुत्र चाहिय ,तो किसी को सुन्दर स्त्री, किसी को मान प्रतिस्ठा, तो किसी को दीर्घायु। बुद्ध चुपचाप सुनते रहे, फिर उन्होंने पूछा।  क्या किसी की व्यक्ति ने निर्वाण की माग की ?
उसने  कहा , नहीं प्रभु एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला, जिसने निर्वाण माँगा हो। बुद्ध ने कहा कोई बात नहीं, एक तू तो है, जो निर्वाण प्राप्त करने के लिए तैयार है। उसने सकुचाते हुए कहा, लेकिन प्रभु अभी तो मैंने एक पुत्र का विवाह नहीं किया है , मै निर्वाण कैसे ले सकता हुँ। 
बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले , अगर तू भी निर्वाण प्राप्ति के लिए तैयार नहीं है, तो भला मैं किसी को निर्वाण जबर्दस्ती  कैसे दूं ?
                                                                               




" एक मात्र वास्तु है जो हमें पशु से भिन्न करती है , वह सही गलत करने की बीच की क्षमता, जो हम सभी में सामान रूप से विद्यामान है। "                 
महात्मा गांधी 

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